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भारत में ब्रिटिश राज के समय जन्मे सर रतन टाटा आज़ादी की लड़ाई से दूर नहीं थे। न्याय के लिए खड़े होने और देश के काम आने का जो विश्वास उनके भीतर था, उसी ने उन्हें भारत की स्वतंत्रता की यात्रा में एक शांत लेकिन अहम भूमिका निभाने वाला व्यक्ति बनाया। उनके इस योगदान को मानते हुए महात्मा गांधी ने उनकी उदारता का ज़िक्र किया और लिखा कि इससे आंदोलन को नई ताक़त मिली। देशभक्त होने के साथ-साथ सर रतन टाटा कला और विरासत के भी बड़े क़द्रदान थे। पाटलिपुत्र में हुई पहली पुरातात्विक खुदाई को उन्होंने आर्थिक सहयोग दिया—जिससे अशोक के सिंहासन कक्ष की खोज संभव हो पाई। आज उनकी जयंती पर, समाज के प्रति ज़िम्मेदारी के रूप में परोपकार में उनका विश्वास हमें याद दिलाता है कि देने की सोच कितनी दूर तक असर डाल सकती है। यही सोच आज भी टाटा ट्रस्ट्स के काम को दिशा देती है, जो पूरे देश में समुदायों को सशक्त बना रहे हैं। #SirRatanTata #Visionary #TataHeritage #LeadersOfIndia #CommunityEmpowerment #TataLegacy #TrustInTata #TataTrusts
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