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#किरण झेंडे के विचार #☝ मेरे विचार
किरण झेंडे के विचार - १. जागते ही (प्रातःकाल ) कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्।।  4444 2 गङ्गे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति।  नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेडस्मिन् सन्निधिं कुरु ।l ३. भोजन से पहले  विष्णुः अन्नं ब्रह्मा रसो " भोक्ता देवो महेश्वरः|  अन्नदोषैर्न लिप्यते ।l एवं ज्ञात्वा तु यो भुङ्क्ते भूमि पर पैर रखने से पहले 4. समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डिते। विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्श क्षमस्व मे ।l  ५. पूजा प्रारंभ से पहले शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।  प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये।।  प्रारंभ से पहले 6. যাসা 31ಕರ್ನಫೆ್' सर्वशत्रुविनाशनम्। पुण्यं जयावहं जपं नित्यं अक्षयं परमं शिवम्।। रात्रि में सोने से पहले 7. रामस्कन्दं हनुमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्। शयनं स्मरते नित्यं दुःस्वप्नं तस्य नश्यति Il , १. जागते ही (प्रातःकाल ) कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्।।  4444 2 गङ्गे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति।  नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेडस्मिन् सन्निधिं कुरु ।l ३. भोजन से पहले  विष्णुः अन्नं ब्रह्मा रसो " भोक्ता देवो महेश्वरः|  अन्नदोषैर्न लिप्यते ।l एवं ज्ञात्वा तु यो भुङ्क्ते भूमि पर पैर रखने से पहले 4. समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डिते। विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्श क्षमस्व मे ।l  ५. पूजा प्रारंभ से पहले शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।  प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये।।  प्रारंभ से पहले 6. যাসা 31ಕರ್ನಫೆ್' सर्वशत्रुविनाशनम्। पुण्यं जयावहं जपं नित्यं अक्षयं परमं शिवम्।। रात्रि में सोने से पहले 7. रामस्कन्दं हनुमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्। शयनं स्मरते नित्यं दुःस्वप्नं तस्य नश्यति Il , - ShareChat