#कुरान संदेश #🤲 इबादत # अल्लाह हु अक़बर #🤲 नात-ए-शरीफ #🕋🌟 नमाज़-ए-फ़ज्र 🌟🕋 #💖मोहब्बत दिल से🤗 #💖Love You ज़िंदगी💞 *सय्यिदा फ़ातिमत ज़हरा रदियल्लाहु तआला अन्हा की तारीखे विलादत व विसाल*
सय्यिदा फ़ातिमत ज़हरा रदियल्लाहु तआला अन्हा की तारीखे विसाल बयान करते हुए हाफ़िज़ इब्न सअद (मतुफ्फ़ा 230 हि.) अपनी मशहूर किताब “अत्तबक़ात” (तबक़ात-ए-इब्न सअद) में लिखते हैं:
“توفيت ليلة الثلاثاء لثلاث خلون من شهر رمضان سنة إحدى عشرة، و هي ابنة تسع و عشرين سنة أو نحوها”
“आप का विसाल 3 रमज़ान 11 हिजरी, मंगल की रात हुआ। उस वक़्त आपकी उम्र 29 साल या उसके आस-पास थी।”
तबक़ात-ए-इब्न सअद सबसे क़दीम माख़ज़ है जिसमें पूरी तहदीद के साथ आपकी तारीखे वफ़ात बयान की गई है। अहल-ए-सुन्नत अहल-ए-हक़ निहायत अकीदत व एहतिराम के साथ 3 रमज़ानुल मुबारक यौमे सय्यिदा फ़ातिमत ज़हरा अकीदत व एहतिराम के साथ मनाते हैं।
अलबत्ता आपकी तारीखे विलादत अहल-ए-सुन्नत के किसी माख़ज़ में मुझे नज़र नहीं आई। न ही साबित है। आइमा-ए-तारीख़ व सीरत ने आम तौर से यह बयान किया है कि एलान-ए-नुबुव्वत से 5 साल क़ब्ल आपकी विलादत हुई। मगर दिन और तारीख़ की तहदीद के साथ किसी सुन्नी माख़ज़ में कोई तारीख़ हमारे इल्म में नहीं।
कुछ शिया माख़ज़ में पूरी तहदीद के साथ “20 जुमा̈दा उल-आख़िरह, रोज़-ए-जुमा” को आपकी तारीखे विलादत कहा गया है बग़ैर सनद के। मगर यह राफ़िज़ियों का क़ौल है, और रावाफ़िज़ ने शातिर-बाज़ी से ऐसा किया कि अहल-ए-सुन्नत की तवज्ज़ोह 22 जुमा̈दा उल-आख़िरह — यौमे अय्याम-ए-अफ़ज़लुल ख़ल्क़ बअद-र्रसूल, सय्यिदुना सिद्दीक़-ए-अकबर रज़ियल्लाहु अन्हु से तवज्जोह हटाकर अपना फ़साद डाल सकें। अहल-ए-सुन्नत के किसी मुस्तनद माख़ज़ में ऐसा कोई क़ौल या तारीख़ मौजूद नहीं।
सैयदा ___ ज़ाहिरा ___ तय्यिबा ___ ताहिरा
जाने अहमद की राहत पे लाखों सलाम
सल्लल्लाहु तआला अला अबीहा व अलैहा व सल्लम

