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#मैथिलीशरण गुप्त की पुण्यतिथि “चारुचंद्र की चंचल किरणें, खेल रहीं हैं जल थल में, स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है अवनि और अम्बरतल में।” — मैथिलीशरण गुप्त ( 3 अगस्त 1886 – 12 दिसंबर 1964) भारतीय साहित्य की महान विभूति, राष्ट्रकवि “मैथिलीशरण गुप्त जी” की 61वीं पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन। जिन्होंने अपनी काव्यधारा से जन-जन में राष्ट्रभक्ति, सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक चेतना का प्रकाश फैलाया। उनकी काव्य रचनाएँ भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभावना की अमूल्य धरोहर हैं। #मैथिलीशरण गुप्त #राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त को नमन #🇮🇳 देशभक्ति #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान
मैथिलीशरण गुप्त की पुण्यतिथि - १२ दिसंबर २०२५ @Harish_Jahirey १२ Dec. ऊँचा हुआ मही का, धन्य हिमालय का उत्कर्षी मस्तक हरि का क्रीडा  क्षेत्र हमारा , भूमि भाग्य ्सा भारतवर्ष II मैथिलीशरण गुप्त (३ अगस्त १८८६ : १२ दिसंबर १९६४ ) چ भूषण हिंदी साहित्य के मूर्धन्य कवि, पद्म भूषण से सम्मानित 'राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्तणी की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि Iharishjahirey in १२ दिसंबर २०२५ @Harish_Jahirey १२ Dec. ऊँचा हुआ मही का, धन्य हिमालय का उत्कर्षी मस्तक हरि का क्रीडा  क्षेत्र हमारा , भूमि भाग्य ्सा भारतवर्ष II मैथिलीशरण गुप्त (३ अगस्त १८८६ : १२ दिसंबर १९६४ ) چ भूषण हिंदी साहित्य के मूर्धन्य कवि, पद्म भूषण से सम्मानित 'राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्तणी की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि Iharishjahirey in - ShareChat