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Deepika ✍️ #📒 मेरी डायरी
📒 मेरी डायरी - का नहीं खुद का जिक्र करती हूं चलो आज किसी और तो अर्ज किया है के आईने को भी शिक़ायत है अड़ियल है ज़िद्दी है न सजती है संवरती है मुझसे ೯ತ್ಡ೯ बांधकर बालों का जुड़ा उसमें पेन रखती है , एक टुक निहारती ব্রী সানী ক্ীৎ अप्सरा हो खोयी रहतीं हैं खयालों में सपनों को पन्नों पर उतार देती हैं, लगाती नहीं काजल आंखों में कभी , पर शब्दों का चंद्र बिंदु बना देती हैं , उलझीं जुल्फें उसकी कभी ज्यादा कहानी को संवार देती हैं संवारती नहीं , क्यों इतनी अल्हड़ है ये, खुद से का नहीं खुद का जिक्र करती हूं चलो आज किसी और तो अर्ज किया है के आईने को भी शिक़ायत है अड़ियल है ज़िद्दी है न सजती है संवरती है मुझसे ೯ತ್ಡ೯ बांधकर बालों का जुड़ा उसमें पेन रखती है , एक टुक निहारती ব্রী সানী ক্ীৎ अप्सरा हो खोयी रहतीं हैं खयालों में सपनों को पन्नों पर उतार देती हैं, लगाती नहीं काजल आंखों में कभी , पर शब्दों का चंद्र बिंदु बना देती हैं , उलझीं जुल्फें उसकी कभी ज्यादा कहानी को संवार देती हैं संवारती नहीं , क्यों इतनी अल्हड़ है ये, खुद से - ShareChat