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#🌷 ॐ गोवर्धन पर्वत नमः #🌷 #गोवर्धन पर्वत 🌺🙏🏻
`जय गोवर्धनधारी 🙏🏻🔺`
`भज गोविन्दम्🙏🏻🔺`
*देवे वर्षति यज्ञविप्लवरुषा वज्राश्मपर्षानिलैः सीदत्पालपशुस्त्रि आत्मशरणं दृष्ट्वानुकम्प्युत्स्मयन् ।*
*उत्पाट्यैककरेण शैलमबलो लीलोच्छिलीन्ध्रं यथा बिभ्रद् गोष्ठमपान्महेन्द्रमदभित् प्रीयान्न इन्द्रो गवाम् ॥२५॥*
[ `श्रीमद्भागवतमहापुराण , १०.२६.२५` ]
`अर्थात 👉🏻 अपना यज्ञभङ्ग होनेके कारण रुष्ट हो कर इन्द्र घनघोर वर्षा कर रहे थे , ( उस समय वर्षाके साथ ) वज्रपातव, ओले एवं प्रचण्ड आँधीसे संत्रस्त होकर श्रीव्रजमण्डलके गोवंश , गोप तथा गोपाङ्गनाएँ अत्यन्त पीडित हो काँप रहे थे । अपने शरणापन्न श्रीव्रजवासियोंकी ऐसी दशा देखकर श्रीभगवान् ने करुणापूर्वक मुस्कुराते हुए अपने एक हाथसे श्रीगिरिराज गोवर्धनको उसी प्रकारसे उखाड़कर धारण कर लिया जिसप्रकारसे कोई बालक खेल-खेलमें बरसाती छत्रकको उखाड़ लेता है औऱ समूचे श्रीव्रजमण्डलकी रक्षा की व देवराज इन्द्रके मदको चूर कर दिया — वे ही श्रीभगवान् गोविन्द हमपर प्रसन्न हों ।`
`भावार्थ 👉🏻 जब देवराज इन्द्र यज्ञभङ्ग होने से क्रोधित होकर वज्र , ओले एवं आँधी की वर्षा कर रहे थे... तब करुणा के सागर श्रीकृष्ण ने एक उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर समस्त व्रज को ७ दिन तक छत्र की तरह ढका । गोप , गौ तथा गोपियों की रक्षा की औऱ इन्द्र का मद चूर किया ।`
`— आज भी जो गोविन्द की शरण में है , उसके जीवन पर कोई संकट नहीं ठहर सकता ।`
`श्रीमात्रे नमः🚩`
`श्रीराम जय राम जय राम🚩`
`जय जय श्रीसीताराम🚩`
`जय जय श्रीउमामहेश्वर🚩`
`जय जय श्रीश्यामाश्याम🚩`
`जय जय श्रीमद्वृन्दावनधाम🚩`
`हर हर महादेव🚩`
`जय जय श्रीमन्नारायण🚩`
`सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः`
*प्रभु कृपा से आप समस्त का आज का दिन मङ्गलमय , प्रेममय एवं भक्तिमय हो💐💐💐*
`जय श्रीकृष्ण🦚`
`गोवर्धन गिरधारी की जय🙏🏻`
`जय जय शङ्कर🚩`
`हर हर शङ्कर🚩`
`~ सर्वज्ञ शङ्कर🚩`
`🌄🌆 प्रभात वन्दन 🌆🌄`
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