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#☝ मेरे विचार #📒 मेरी डायरी
☝ मेरे विचार - रिश्ते और पतंग जितनी उँचाई पर होते हैं, काटने वालो की संख्या उतनी अधिक होती हैं कमाल है "बिखरे" सब अंदर से है ! यहा...और संवार "जिस्म" को रहें है ! मैं अन्धेरा हूं तो अफसोस क्यूं करूं खुश हुं कि रौशनी का वजूद है....!! मुझसे ज़िन्दगी के सफ़र में मैंने अब तक तो यही जाना है, ख्वाहिशों का हाथ अक्सर मजबूरियों ने थामा है! दौलत नहीं , शोहरत नहीं न वाह वाह चाहिए, कैसे हो ? कहाँ हो ? बस दो लफ़्जों की परवाह चाहिए ! रिश्ते और पतंग जितनी उँचाई पर होते हैं, काटने वालो की संख्या उतनी अधिक होती हैं कमाल है "बिखरे" सब अंदर से है ! यहा...और संवार "जिस्म" को रहें है ! मैं अन्धेरा हूं तो अफसोस क्यूं करूं खुश हुं कि रौशनी का वजूद है....!! मुझसे ज़िन्दगी के सफ़र में मैंने अब तक तो यही जाना है, ख्वाहिशों का हाथ अक्सर मजबूरियों ने थामा है! दौलत नहीं , शोहरत नहीं न वाह वाह चाहिए, कैसे हो ? कहाँ हो ? बस दो लफ़्जों की परवाह चाहिए ! - ShareChat