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#मेरी कलम✍️ #✍️ साहित्य एवं शायरी
मेरी कलम✍️ - दिल जलो की बस्ती में दिल के अरमाँ कहाँ बाकी है,हम कबके खाक हो गये, उनके जाज्बत अभी बाकी है, शशि दिल जलो की बस्ती में दिल के अरमाँ कहाँ बाकी है,हम कबके खाक हो गये, उनके जाज्बत अभी बाकी है, शशि - ShareChat