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https://sharechat.com/post/6a4Kn7rx?d=n&ui=yky6NO&e1=c #मकर संक्रांति
मकर संक्रांति - चर्ों दाक १५ जनवरी को ही मनेगी N ( फिर १६ को होगा पर्व मकर संक्रांति 1 जागरण संवाददाता वाराणसी प्रत्येक ७२ वर्ष में बदल जाती है संक्रांति की तिथि ग्रहों के राजा सूर्य १४ जनवरी की रात्रि २००८ सेआरंभ हुआ बदलाव चलेगा १३१ बजे धनु से मकर राशि में प्रवेश २०८० तक करेंगे और संक्रांति का पुण्यकाल १६ घंटे तक यानी अगले हैं। यह पीछे नहीं चलते हैं के बाद इसलिए सूर्योदय 15 इनकी संक्रांति का समय ७२ वर्षों में एक जनवरी को   दोपहर बाद तक TTTTT दिन बढ़ जाता है। इस दृष्टि से यह ७२ जाएगा । साल वर्ष २००८ में ही पूरे हो गए थे। सूर्य की चाल और राशियों में संक्रांति को ज्योतिषीय गणित की दृष्टि से देखें तो हालांकि छह वर्षों तक सूर्य का राशि काल में होने से पूर्व काल পনা মলনা ই কি অমল 54 নর্মী নন্ধ পনেনন সান: यानी वर्ष २०८० तक मकर संक्रांति जनवरी को मानकर मकर संक्रांति 15 15 जनवरी को मनाई जाएगी। इसके   बाद मनाई जाती थी। फिर ज्योतिष गणना के अनुसार मकर  पहले सूर्य का राशि परिवर्तन इसके संक्रांति एक दिन और आगे बढ़कर १६ संध्याकाल में होता था। १९३६ से मकर जनवरी को हुआ करेगी।  १४ जनवरी को मनाई जा रही संक्रांति ज्योतिषविद् थी। इससे पहले १८६४ से १९३६ तक १३ दैवज्ञ आचार्य कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि प्रतिवर्ष सूर्य के राशि जनवरी और १७१२ से १८६३ तक १२ परिवर्तन में २० मिनट का विलंब होता मनाई रही जनवरी को थी। जा है। इस प्रकार तीन वर्षों में यह अंतर एक उल्लेखनीय है कि॰ वर्ष স 1863 12 जनवरी को जब स्वामी विवेकानंद घंटे का हो जाता है। का ७२  वर्षों में २४ घंटे का अंतर आ जन्म हुआ था॰ उस दिन मकर संक्रांति जाता है। सूर्य व चंद्रमा ग्रह मार्गीय होते का पर्व था। चर्ों दाक १५ जनवरी को ही मनेगी N ( फिर १६ को होगा पर्व मकर संक्रांति 1 जागरण संवाददाता वाराणसी प्रत्येक ७२ वर्ष में बदल जाती है संक्रांति की तिथि ग्रहों के राजा सूर्य १४ जनवरी की रात्रि २००८ सेआरंभ हुआ बदलाव चलेगा १३१ बजे धनु से मकर राशि में प्रवेश २०८० तक करेंगे और संक्रांति का पुण्यकाल १६ घंटे तक यानी अगले हैं। यह पीछे नहीं चलते हैं के बाद इसलिए सूर्योदय 15 इनकी संक्रांति का समय ७२ वर्षों में एक जनवरी को   दोपहर बाद तक TTTTT दिन बढ़ जाता है। इस दृष्टि से यह ७२ जाएगा । साल वर्ष २००८ में ही पूरे हो गए थे। सूर्य की चाल और राशियों में संक्रांति को ज्योतिषीय गणित की दृष्टि से देखें तो हालांकि छह वर्षों तक सूर्य का राशि काल में होने से पूर्व काल পনা মলনা ই কি অমল 54 নর্মী নন্ধ পনেনন সান: यानी वर्ष २०८० तक मकर संक्रांति जनवरी को मानकर मकर संक्रांति 15 15 जनवरी को मनाई जाएगी। इसके   बाद मनाई जाती थी। फिर ज्योतिष गणना के अनुसार मकर  पहले सूर्य का राशि परिवर्तन इसके संक्रांति एक दिन और आगे बढ़कर १६ संध्याकाल में होता था। १९३६ से मकर जनवरी को हुआ करेगी।  १४ जनवरी को मनाई जा रही संक्रांति ज्योतिषविद् थी। इससे पहले १८६४ से १९३६ तक १३ दैवज्ञ आचार्य कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि प्रतिवर्ष सूर्य के राशि जनवरी और १७१२ से १८६३ तक १२ परिवर्तन में २० मिनट का विलंब होता मनाई रही जनवरी को थी। जा है। इस प्रकार तीन वर्षों में यह अंतर एक उल्लेखनीय है कि॰ वर्ष স 1863 12 जनवरी को जब स्वामी विवेकानंद घंटे का हो जाता है। का ७२  वर्षों में २४ घंटे का अंतर आ जन्म हुआ था॰ उस दिन मकर संक्रांति जाता है। सूर्य व चंद्रमा ग्रह मार्गीय होते का पर्व था। - ShareChat