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✍️ साहित्य एवं शायरी - निढा़ फ़़ाज़ली हम लबों से कह न पाए उन से हाल-ए-दिल कभी और वो समझे नहीं ये ख़ामोशी क्या चीज़ है निढा़ फ़़ाज़ली हम लबों से कह न पाए उन से हाल-ए-दिल कभी और वो समझे नहीं ये ख़ामोशी क्या चीज़ है - ShareChat