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#Quran and We #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #points to ponder #सोचने वाली बात #islam guide us in every field of life
Quran and We - हो कि तुम "क्या तुम यह समझते (सिर्फ़ दावा करने से) जन्नत में दाख़िल हो*्जाओगे , जबकि तुम पर वैसी परीक्षाएँ अभी नहीं आईं जैसी पहले लोगों पर आई थीं? तुमसे उन पर तंगी , गरीबी और तकलीफ़ें आईं, बीमारियाँ आईं, और वे इस दिए क़दर हिला गए।" (सूरह अल-्बक़रह २:२1४) यहाँ अल्लाह तआला ह्में बताते हैं कि वह अपने बन्दों को ज़रूर इम्तिहान में डालते हैं=चाहे वह आसानी के ज़रिये हो या मुश्किलों के ज़रिये =्जैसा कि पहले लोगों को आज़माया गया। क़ानून है जो यह अल्लाह का अटल कभी बदलता नहीं। जो भी उसके दीन पर चलेगा और उसके का पालन करेगा , उसे हुरक्मों आज़माया ही जाएगा| हो कि तुम "क्या तुम यह समझते (सिर्फ़ दावा करने से) जन्नत में दाख़िल हो*्जाओगे , जबकि तुम पर वैसी परीक्षाएँ अभी नहीं आईं जैसी पहले लोगों पर आई थीं? तुमसे उन पर तंगी , गरीबी और तकलीफ़ें आईं, बीमारियाँ आईं, और वे इस दिए क़दर हिला गए।" (सूरह अल-्बक़रह २:२1४) यहाँ अल्लाह तआला ह्में बताते हैं कि वह अपने बन्दों को ज़रूर इम्तिहान में डालते हैं=चाहे वह आसानी के ज़रिये हो या मुश्किलों के ज़रिये =्जैसा कि पहले लोगों को आज़माया गया। क़ानून है जो यह अल्लाह का अटल कभी बदलता नहीं। जो भी उसके दीन पर चलेगा और उसके का पालन करेगा , उसे हुरक्मों आज़माया ही जाएगा| - ShareChat