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#रविदास जयंती की शुभकामनाएं #हैप्पी गुरु रविदास जयंती #रविदास जयंती
रविदास जयंती की शुभकामनाएं - गुरु रविदास जी एक महान भारतीय संत, कवि, समाज सुधारक और दार्शनिक थे। संत रविदास जी ने अपनी वाणी से हमेशा धर्म और जाति के नाम पर होने वाली असमानता को मिटाने की कोशिश की है। संत रविदास के जन्म की प्रामाणिक तिथि को लेकर विद्वानों में मतभेद हैं लेकिन अधिकतर विद्वान सन् १३९८ में माघ शुक्ल पूर्णिमा को उनकी जन्म तिथि मानते हैं। इन्होने अपने गीतों और कहावतों के जरिए भक्ति आन्दोलन पर एक स्थायी प्रभाव डाला था। मन चंगा तो कठौती में गंगा अर्थ- जिस व्यक्ति का मन पवित्र होता है, उसके पर मां ತm गंगा भी एक बर्तन ( कठौती ) में आ जाती हैं। पूछिए, का जात अरू पात। जनम जात मत रैदास पूत सब प्रभु के, कोए नहिं जात कुजातII  अर्थ- किसी की जाति नहीं पूछनी चाहिए क्योंकि संसार में कोई जाति - पाँति नहीं है। सभी मनुष्य एक ही ईश्वर की संतान हैं। यहाँ कोई जाति, बुरी जाति नहीं है। मन ही पूजा मन ही धूप, मन ही सेऊं सहज स्वरूप अर्थ- निर्मल मन में ही भगवान वास करते हैं। अगर आपके मन में किसी के लिए बैर भाव नहीं है, कोई लालच या द्वेष नहीं है तो आपका मन ही भगवान का मंदिर, दीपक और धूप है। ऐसे ही पवित्र विचारों वाले मन में प्रभु सदैव निवास करते हैं। गुरु रविदास जी एक महान भारतीय संत, कवि, समाज सुधारक और दार्शनिक थे। संत रविदास जी ने अपनी वाणी से हमेशा धर्म और जाति के नाम पर होने वाली असमानता को मिटाने की कोशिश की है। संत रविदास के जन्म की प्रामाणिक तिथि को लेकर विद्वानों में मतभेद हैं लेकिन अधिकतर विद्वान सन् १३९८ में माघ शुक्ल पूर्णिमा को उनकी जन्म तिथि मानते हैं। इन्होने अपने गीतों और कहावतों के जरिए भक्ति आन्दोलन पर एक स्थायी प्रभाव डाला था। मन चंगा तो कठौती में गंगा अर्थ- जिस व्यक्ति का मन पवित्र होता है, उसके पर मां ತm गंगा भी एक बर्तन ( कठौती ) में आ जाती हैं। पूछिए, का जात अरू पात। जनम जात मत रैदास पूत सब प्रभु के, कोए नहिं जात कुजातII  अर्थ- किसी की जाति नहीं पूछनी चाहिए क्योंकि संसार में कोई जाति - पाँति नहीं है। सभी मनुष्य एक ही ईश्वर की संतान हैं। यहाँ कोई जाति, बुरी जाति नहीं है। मन ही पूजा मन ही धूप, मन ही सेऊं सहज स्वरूप अर्थ- निर्मल मन में ही भगवान वास करते हैं। अगर आपके मन में किसी के लिए बैर भाव नहीं है, कोई लालच या द्वेष नहीं है तो आपका मन ही भगवान का मंदिर, दीपक और धूप है। ऐसे ही पवित्र विचारों वाले मन में प्रभु सदैव निवास करते हैं। - ShareChat