महावीर जी ने किसी से धर्मदेशना (दीक्षा) नहीं ली थी यानि गुरू नहीं बनाया था। जबकि कबीर परमात्मा ने कहा है:
गुरू बिन माला फेरते, गुरू बिन देते दान।
गुरू बिन दोनों निष्फल है, पूछो वेद पुराण।।
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