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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - मैं से शून्य तक है- ' बाहर' से 'भीतर' अध्यात्म यात्रा की ओर , 'शोर' से 'शांति' की ओर, और ' अहंकार' से 'शून्य' की ओर। जहाँ तुम्हारा ' मैं' समाप्त होता है, वहीं से ईश्वर शुरू होता है। मैं से शून्य तक है- ' बाहर' से 'भीतर' अध्यात्म यात्रा की ओर , 'शोर' से 'शांति' की ओर, और ' अहंकार' से 'शून्य' की ओर। जहाँ तुम्हारा ' मैं' समाप्त होता है, वहीं से ईश्वर शुरू होता है। - ShareChat