ShareChat
click to see wallet page
search
#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - हमको सोने की क़लम, चाँदी की स्याही चाहिए चाहिए लिए शेर कहने के साक़ी सुराही दिए हैं ताक़ पर सबने ही अब जलते सवाल रख चाहिए आज के फ़नकार को बस वाहवाही लथपथ पडा है हर क़दम पर आदमी खून से क्रूरता की आपको अब क्या गवाही चाहिए खौफ़ बेचा जा रहा, बाज़ार में कम दाम पर में तबाही चाहिए क्योंकि ज़ालिम को, मुनाफ़े लिए सिर्फ़ कहने के ೯ ೩೩T # जम्हूरियत आज भी आवाम को, ज़िल्ले - इलाही चाहिए आपकी बातों में आकर, आपके हम हो लिए भी बादशाही चाहिए आपको क्या पता था हमको सोने की क़लम, चाँदी की स्याही चाहिए चाहिए लिए शेर कहने के साक़ी सुराही दिए हैं ताक़ पर सबने ही अब जलते सवाल रख चाहिए आज के फ़नकार को बस वाहवाही लथपथ पडा है हर क़दम पर आदमी खून से क्रूरता की आपको अब क्या गवाही चाहिए खौफ़ बेचा जा रहा, बाज़ार में कम दाम पर में तबाही चाहिए क्योंकि ज़ालिम को, मुनाफ़े लिए सिर्फ़ कहने के ೯ ೩೩T # जम्हूरियत आज भी आवाम को, ज़िल्ले - इलाही चाहिए आपकी बातों में आकर, आपके हम हो लिए भी बादशाही चाहिए आपको क्या पता था - ShareChat