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#📖 कविता और कोट्स✒️ #📚कविता-कहानी संग्रह #✍️ साहित्य एवं शायरी #📓 हिंदी साहित्य #🥰Express Emotion
📖 कविता और कोट्स✒️ - तू मैं सवेरा कोई है रात का चांद भला क्या हो रिश्ता तेरा मेरा कोई गर रब बख्शे जरा भी कुछ मुझको मैं मांग लेता उस से पल तेरा कोई चाहिए मिलन उस चांद का मुझको काश! पलभर को करदे अंधेरा कोई आज सूरज सरिखा ই তমাল तुझमें एन्जान! दोष फिर कैसे हो मेरा कोई इधर को तू ना आना सहर में कभी भी देख छिड़ ना जाए बखेड़ा तेरा-मेरा कोई दिख रहा ये मुखड़ा तेरा आधे चांद सा चेहरे से हटा दे का पहरा कोई जुल्फों जरा तू मैं सवेरा कोई है रात का चांद भला क्या हो रिश्ता तेरा मेरा कोई गर रब बख्शे जरा भी कुछ मुझको मैं मांग लेता उस से पल तेरा कोई चाहिए मिलन उस चांद का मुझको काश! पलभर को करदे अंधेरा कोई आज सूरज सरिखा ই তমাল तुझमें एन्जान! दोष फिर कैसे हो मेरा कोई इधर को तू ना आना सहर में कभी भी देख छिड़ ना जाए बखेड़ा तेरा-मेरा कोई दिख रहा ये मुखड़ा तेरा आधे चांद सा चेहरे से हटा दे का पहरा कोई जुल्फों जरा - ShareChat