1857 की क्रांति में अदम्य साहस और बलिदान की प्रतीक, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की सेना के 'दुर्गा दल' की सेनापति वीरांगना झलकारी बाई जी की जयंती पर सादर नमन। वे रानी की हमशक्ल थीं और अपनी वीरता से अंग्रेजों को गुमराह कर मातृभूमि के लिए प्राण न्योछावर कर दिए, जो सदा राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करेगा।
वीरांगना झलकारी बाई जी के बारे में कुछ तथ्य:
जन्म: उनका जन्म 22 नवम्बर 1830 को झांसी के पास भोजला गाँव में एक निर्धन परिवार में हुआ था।
शौर्य: वह न केवल एक उत्कृष्ट निशानेबाज और घुड़सवार थीं, बल्कि उन्होंने दुर्गा दल (महिला सेना) का नेतृत्व भी किया।
बलिदान: झांसी की रक्षा के लिए, उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई के वेश में अंग्रेजों का सामना किया और अंत तक लड़ते हुए अपने प्राण मातृभूमि को समर्पित कर दिए। 🙏🙏
#वीरांगना झलकारी बाई जी



