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#हर दिन #दिवसः #हरपल
हर दिन - लोसारमहोत्सच .ar=55, लोसार (तिब्बतीः वाइलीः लो-गियरः नया साल . जिसे तिब्बती नव वर्ष भी कहा जाता है) बौद्ध धर्म का एक  यह त्योहार विभिन्न स्थानों (तिब्बत भूटान  नेपाल  त्योहार है भारत) की परंपरा के अनुसार अलग ्अलग तिथियों पर मनाया  जाता है। यह त्योहार नव वर्ष दिवस का उत्सव है, जो तिब्बती  पंचांग के पहले दिन मनाया जाता हैे, जो ग्रेगोरियन पंचांग के किसी महीने या मार्च माह की तिथि के अनुरूप होता है।  दिन से शुरू  २०२० में॰ नव वर्ष ग्रेगोरियन कैलेंडर के चौबीसवे हुआ और उत्सव छब्बीसरवें दिन तक चला।  साथ ही नर  इसके लौह चूहे का वर्ष भी शुरू हुआ। भारत में इस उत्सव के एक  रूप को ल्होच्छर कहा जाता है और इसकी शुरुआत तिब्बती  लोसार से आठ सप्ताह पहले हुई थी।  लोसार की परंपरा सिटसांग में बोद्ध धर्म के आगमन से भी॰ पहले की है और इसकी जड़ें बोन धर्म की एक विशेष  शीतकालीन धूप जलाने की प्रथा में निहित हैं। ऐसा कहा जाता  है कि तिब्बत के नौर्वे राजा पुदे गुंग्याल (३17 ३१८) के शासनकाल के दौरान यह परंपरा फसल उत्सव के साथ  मिलकर वार्षिक लोसार उत्सव बन गई। यह त्योहार नव वर्षका  उत्सव है,जो तिब्बती चंद्र सौर पंचांग के पहले दिन मनाया " जाता है, जो ग्रेगोरियन पंचांग के अनुसार फरवरी या मार्च में पड़ता हे।  लोसारमहोत्सच .ar=55, लोसार (तिब्बतीः वाइलीः लो-गियरः नया साल . जिसे तिब्बती नव वर्ष भी कहा जाता है) बौद्ध धर्म का एक  यह त्योहार विभिन्न स्थानों (तिब्बत भूटान  नेपाल  त्योहार है भारत) की परंपरा के अनुसार अलग ्अलग तिथियों पर मनाया  जाता है। यह त्योहार नव वर्ष दिवस का उत्सव है, जो तिब्बती  पंचांग के पहले दिन मनाया जाता हैे, जो ग्रेगोरियन पंचांग के किसी महीने या मार्च माह की तिथि के अनुरूप होता है।  दिन से शुरू  २०२० में॰ नव वर्ष ग्रेगोरियन कैलेंडर के चौबीसवे हुआ और उत्सव छब्बीसरवें दिन तक चला।  साथ ही नर  इसके लौह चूहे का वर्ष भी शुरू हुआ। भारत में इस उत्सव के एक  रूप को ल्होच्छर कहा जाता है और इसकी शुरुआत तिब्बती  लोसार से आठ सप्ताह पहले हुई थी।  लोसार की परंपरा सिटसांग में बोद्ध धर्म के आगमन से भी॰ पहले की है और इसकी जड़ें बोन धर्म की एक विशेष  शीतकालीन धूप जलाने की प्रथा में निहित हैं। ऐसा कहा जाता  है कि तिब्बत के नौर्वे राजा पुदे गुंग्याल (३17 ३१८) के शासनकाल के दौरान यह परंपरा फसल उत्सव के साथ  मिलकर वार्षिक लोसार उत्सव बन गई। यह त्योहार नव वर्षका  उत्सव है,जो तिब्बती चंद्र सौर पंचांग के पहले दिन मनाया " जाता है, जो ग्रेगोरियन पंचांग के अनुसार फरवरी या मार्च में पड़ता हे। - ShareChat