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#GodNightThursday #MakaraSankranti26 , मांसाहार निषेध हैं चाहे हिन्दू हो या मुस्लिम, सिक्ख हो या ईसाई सभी धर्म ग्रन्थों में मांसाहार को परमात्मा ने निषेध किया है। मगर सभी धर्म के लोगो मे मांसाहार बहुत तेजी से बढ़ रहा है। परमेश्वर कबीर साहेब जी कहते हैं कि कबीर, मांस अहारी मानई, प्रत्यक्ष राक्षस जानि। ताकी संगति मति करै, होइ भक्ति में हानि।। कबीर, मांस मछलिया खात हैं, सुरापान से हेत। ते नर नरकै जाहिंगे, माता पिता समेत।। कबीर, मांस मांस सब एक है, मुरगी हिरनी गाय। जो कोई यह खात है, ते नर नरकहिं जाय।। कबीर, जीव हनै हिंसा करै, प्रगट पाप सिर होय। निगम पुनि ऐसे पाप तें, भिस्त गया नहिंकोय।। कबीर, तिलभर मछली खायके, कोटि गऊ दै दान। काशी करौत ले मरै, तौ भी नरक निदान।। कबीर, बकरी पाती खात है, ताकी काढी खाल। जो बकरीको खात है, तिनका कौन हवाल।। कबीर,अंडा किनबिसमिल किया,घुनकिन किया हलाल। मछली किन जबह करी, सब खानेका ख्याल।। कबीर, मुला तुझै करीम का, कब आया फरमान। घट फोरा घर घर दिया, साहब का नीसान।। कबीर, काजी का बेटा मुआ, उरमैं सालै पीर। वह साहब सबका पिता, भला न मानै बीर।। कबीर, पीर सबनको एकसी, मूरख जानैं नाहिं। अपना गला कटायकै, भिश्त बसै क्यों नाहिं।। कबीर, जोरी करि जबह करै, मुखसों कहै हलाल। साहब लेखा मांगसी, तब होसी कौन हवाल।। कबीर, जोर कीयां जुलूम है, मागै ज्वाब खुदाय। खालिक दर खूनी खडा, मार मुही मुँह खाय।। कबीर, गला काटि कलमा भरै, कीया कहै हलाल। साहब लेखा मांगसी, तब होसी कौन हवाल।। कबीर, गला गुसाकों काटिये, मियां कहरकौ मार। जो पांचू बिस्मिल करै, तब पावै दीदार।। कबीर, कबिरा सोई पीर हैं, जो जानै पर पीर। जो पर पीर न जानि है, सो काफिर बेपीर।। कबीर, कहता हूं कहि जात हूं, कहा जो मान हमार। जाका गला तुम काटि हो, सो फिर काटै तुम्हार।। कबीर, हिन्दू के दाया नहीं, मिहर तुरकके नाहिं। कहै कबीर दोनूं गया, लख चैरासी मांहि।। कबीर, मुसलमान मारै करद सों, हिंदू मारे तरवार। कह कबीर दोनूं मिलि, जावैं यमके द्वार।। परमात्मा का आदेश नहीं मानेगे तो सजा भी तगडी मिलेगी। दोनों धर्मों को समझाते हुए सूक्ष्मवेद में कहा गया है कि हिन्दू परमेश्वर के जीवों का गला धीरे-धीरे काटते हैं और मुस्लिम झटके से काटते हैं और इस कार्य को पुण्य बताते हैं लेकिन ये दोनों ही पाप (कुफ़र) कर रहे हैं जिसके लिए इन कसाइयों को नरक में डाला जाएगा। बात करते हैं पुण्य की, करते हैं घोर अधर्म। दोनों दीन नरक में पड़हीं, कुछ तो करो शर्म।। महापापी जो करे जीव हिंसा माता कभी बकरे मुर्गे नहीं मांगती है। वो मां है, देवी है, वो तो दयालु है। यदि पूर्ण गुरु से दीक्षा लेकर माता के मूल मंत्र का जाप किया जाए तो साधक को मनचाहा लाभ देती है। हम सभी मानते हैं कि संसार में जितने भी जीव जन्तु या मनुष्य शरीरधारी प्राणी हैं वे सभी एक परमात्मा के बच्चे हैं तो जरा स्वयं विचार करें कि क्या एक पिता अपने बच्चों की हत्या करने वालों से खुश होगा? बिल्कुल नहीं हो सकता बल्कि वह दु:खी होगा, जिसका दंड भी हमें प्रदान करेगा। अर्थात जीव हत्या करना महापाप है। జ్ఞాన గంగా #sant ram pal ji maharaj #me follow
sant ram pal ji maharaj - महापापी जो करे जीव हिंसा माँ दयालु व करुणामयी होती है वह बलि या जीव हत्या से प्रसन्न नही होती। कबीर परमेश्वर जी ने कहा है किः कबीर, मांस आहारी मानव, प्रत्यक्ष राक्षस जानि। ताकी संगति मति करै, होइ भक्ति में हानि। । '్ల निःशुल्क पायें पवित्र पुस्तक अपना नाम, परा पता भेजें ज्ञान गगा +91 7496801823 = @ SPIRITUAL LEADER SANT RAHPAL JI @SAINTRAMPALIM SUPREMLGOD ORO SAINT RAMPAL JI MAHARAY महापापी जो करे जीव हिंसा माँ दयालु व करुणामयी होती है वह बलि या जीव हत्या से प्रसन्न नही होती। कबीर परमेश्वर जी ने कहा है किः कबीर, मांस आहारी मानव, प्रत्यक्ष राक्षस जानि। ताकी संगति मति करै, होइ भक्ति में हानि। । '్ల निःशुल्क पायें पवित्र पुस्तक अपना नाम, परा पता भेजें ज्ञान गगा +91 7496801823 = @ SPIRITUAL LEADER SANT RAHPAL JI @SAINTRAMPALIM SUPREMLGOD ORO SAINT RAMPAL JI MAHARAY - ShareChat