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#बेपनाह मोहब्बत #💚💜♥️♤लव शायरी♤मेरे दिल के अल्फाज♤मेरे जज्बात♤♥️💜💚{सुकून सिर्फ तुम}♥️रश्मिदत्ता♥️👈 #♥️♥️अल्फाज ए मुहब्बत ए इश्क मेरे जज्बात ♥️♥️ #दिल कि बातें ... दिल कि कलम से #💕 "लफ्ज़" कुछ तेरे....कुछ मेरे.... 💘 R
बेपनाह मोहब्बत - वो महफ़िल में अपनी बुला भी रहे हैं। बढ़ा भी रहे हैं। इधर फासले 64 बहुत कशमकश में है उनकी इनायत , बना   भी रहे हैं , मिटा भी रहे हैं। वफ़ा का मुझे ज़िक्र करना नही है॰ गलत शख़्स वो आज़मा भी रहे हैं। दिवाने को खुद की  खबर ही नहीं है, वो अपनी कहानी सुना भी रहे हैं। यकीं उठ गया है मिरा आशिक़ी से, वो हारे हुए को हरा भी   रहे हैं। खुलेगे कभी बंद दरवाज़े सूरज, नज़र में नए ख़्वाब आभी रहे हैं। मिरे हाल पर रोने वाले तो देखो, के दस्ती१ मुस्कुरा भी रहे हैं। छुपा उन्हें आरजू है कि बाहों में भर लूँ॰ वो आँचल से ख़ंजर छुपा भी रहे हैं। गली से भी मेरी वो गुज़रे ही क्यूँ थे, मिले भी नही और जा भी रहे हैं। 8o@ ७०8 वो महफ़िल में अपनी बुला भी रहे हैं। बढ़ा भी रहे हैं। इधर फासले 64 बहुत कशमकश में है उनकी इनायत , बना   भी रहे हैं , मिटा भी रहे हैं। वफ़ा का मुझे ज़िक्र करना नही है॰ गलत शख़्स वो आज़मा भी रहे हैं। दिवाने को खुद की  खबर ही नहीं है, वो अपनी कहानी सुना भी रहे हैं। यकीं उठ गया है मिरा आशिक़ी से, वो हारे हुए को हरा भी   रहे हैं। खुलेगे कभी बंद दरवाज़े सूरज, नज़र में नए ख़्वाब आभी रहे हैं। मिरे हाल पर रोने वाले तो देखो, के दस्ती१ मुस्कुरा भी रहे हैं। छुपा उन्हें आरजू है कि बाहों में भर लूँ॰ वो आँचल से ख़ंजर छुपा भी रहे हैं। गली से भी मेरी वो गुज़रे ही क्यूँ थे, मिले भी नही और जा भी रहे हैं। 8o@ ७०8 - ShareChat