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#❤️अस्सलामु अलैकुम
❤️अस्सलामु अलैकुम - आज का मुसलमान.. मुसलमान रोता तो है... 3াত কা मगर अपने गुनाहों पर नहीं, की परेशानियों पर रोता है... दुनिया नमाज़ भी पढ़ता है... मगर दिल कहीं और भटकता रहता है... कुरआन भी रखता है.. मगर उसे खोलने की फुर्सत नहीं मिलती. रातों को जागता भी है... লিৎ; मगर मोबाइल के तहज्जुद के लिए नहीं... हर वक्त कहता है " टाइम नहीं है..." मगर क़यामत के दिन यही वक्त सबसे बडा हिसाब बनेगा... आज का मुसलमान.. मुसलमान रोता तो है... 3াত কা मगर अपने गुनाहों पर नहीं, की परेशानियों पर रोता है... दुनिया नमाज़ भी पढ़ता है... मगर दिल कहीं और भटकता रहता है... कुरआन भी रखता है.. मगर उसे खोलने की फुर्सत नहीं मिलती. रातों को जागता भी है... লিৎ; मगर मोबाइल के तहज्जुद के लिए नहीं... हर वक्त कहता है " टाइम नहीं है..." मगर क़यामत के दिन यही वक्त सबसे बडा हिसाब बनेगा... - ShareChat