ब्रज के दर्शन 🙏
चंद्र सरोवर (परासौली गाँव)
ये ब्रज का वो स्थान है जहां कृष्ण ने शरद पूर्णिमा के दिन महारास किया था और रास से अंर्तध्यान हो गए थे। ये स्थान ब्रज के प्रमुख 4 सरोवरों में से एक है ऑफ ब्रज के 24 उपवनों में आता है यही सूरदास जी ने तप किया और यही ब्रह्मलीन हो गये
सूरदास (1478 ई. – 1583 ई.)
सूरदास जी का जन्म वैशाख शुक्ल पंचमी दिन मंगलवार को संवत 1535 वि. में रुनकता ग्राम में हुआ। ये कृष्ण के अनन्य भक्त थे। परम सत्य श्री कृष्ण के बाल गोपाल की जैसी तन्मयता से वर्णन सूरदास जी ने किया वैसा हिंदी साहित्य में फिर कभी दुबारा न हुआ। वर्णनों में वात्सल्य और प्रेम की चाशनी है। इनके विषय में प्रसिद्ध गायक तानसेन ने कहा है –
“किंधौ सूर की सर लग्यौ, किंधौ सूर की पीर
किंधौ सूर को पद सुन्यौ, तन-मन धुनत सरीर।”
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