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#fact #true #📃लाइफ कोट्स ✒️
fact - वो नारी॰ जो स्वच्छंद आकाश सी थी आज अपने ही पंख समेटे मर्यादाओं के जाल में उलझी खड़ी है... और वो पुरुष, जिसकी मुस्कान में जीवन का उजास था उत्तरदायित्वों के भार तले अब अपने ही हृदय से दूर होता जा रहा है.. कैसा है ये विकास... ? जहाँ भावनाएँ क्षीण हो रही हैं, और संवेदनाएँ सिर्फ शब्दों में सिमटती जा रही हैं.. उन्नति की इस चकाचौंध में हमने खो दिया है वो सहज अपनापन, जो कभी आँखों की नमी से भी समझ लिया जाता था. अब संवाद नहीं, |4 सिर्फ औपचारिकताएँ గే और रिश्ते - बस एक अभिनय बनकर रह गए हैं. शायद यही समय है स्वयं से प्रश्न करने का- क्या सच में हम आगे बढ़े हैं...? या बस अपनी आत्मा को पीछे छोड़ आए हैं. वो नारी॰ जो स्वच्छंद आकाश सी थी आज अपने ही पंख समेटे मर्यादाओं के जाल में उलझी खड़ी है... और वो पुरुष, जिसकी मुस्कान में जीवन का उजास था उत्तरदायित्वों के भार तले अब अपने ही हृदय से दूर होता जा रहा है.. कैसा है ये विकास... ? जहाँ भावनाएँ क्षीण हो रही हैं, और संवेदनाएँ सिर्फ शब्दों में सिमटती जा रही हैं.. उन्नति की इस चकाचौंध में हमने खो दिया है वो सहज अपनापन, जो कभी आँखों की नमी से भी समझ लिया जाता था. अब संवाद नहीं, |4 सिर्फ औपचारिकताएँ और रिश्ते - बस एक अभिनय बनकर रह गए हैं. शायद यही समय है स्वयं से प्रश्न करने का- क्या सच में हम आगे बढ़े हैं...? या बस अपनी आत्मा को पीछे छोड़ आए हैं. - ShareChat