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#❤️अस्सलामु अलैकुम
❤️अस्सलामु अलैकुम - अगर आंख की रौशनी ख़त्म हो जाए तो इंसान रात और दिन में फर्क़ नहीं कर सकता है, ऐसे ही जब इंसान का दिल सियाह हो जाता है तो वह हक़ और बातिल में फर्क़ नहीं कर पाता है अल्लाह पाक के ज़िक्र से अपने दिलों को ज़िंदा कीजिए. मुर्दा Guam_ mustafa85| अगर आंख की रौशनी ख़त्म हो जाए तो इंसान रात और दिन में फर्क़ नहीं कर सकता है, ऐसे ही जब इंसान का दिल सियाह हो जाता है तो वह हक़ और बातिल में फर्क़ नहीं कर पाता है अल्लाह पाक के ज़िक्र से अपने दिलों को ज़िंदा कीजिए. मुर्दा Guam_ mustafa85| - ShareChat