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#✍मेरे पसंदीदा लेखक
✍मेरे पसंदीदा लेखक - धरती प्रणाम मंत्र सूर्य नमन मंत्र प्रातः काल मंत्र आदिदेव नमस्तुभ्यं कराग्रे वसते लक्ष्मी देवी चसने समुद्र प्रसीद मम भास्कर। पर्वत स्तन मंडले। करमध्ये सरस्वती| दिवाकर नमस्तुभ्यं নিষ্য  पत्नि नमस्तुभ्यं करमूले तु गोविन्दः, नमोडस्तुते ।। #Il प्रभाते कर दर्शनम् ।। पादस्पर्श क्षमस्व  ٥٩٥ इस मंत्र से भगवान सूर्य का न  इस मंत्र को पढने के बाद धरती इस मंत्र को दोनों हाथों को देखते मन करने से घर में धन की वृद्धि को प्रणाम कर पैर रखें। हुए बोलें।  होती है। ctu रोग नाशक मंत्र गृह शांति मंत्र आपदानाशक मंत्र अच्युतानंदगोविंद आपदामपहर्तारं या देवी सर्व भूतेषु भेषजात्। शांति रूपेण संस्थिता दातारं सर्व सम्पदाम् नामाच्चारण लोकाभिरामं श्रीराम, नश्यन्ति सकला रोगाः नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्ये नमो नमः ।। भूयो भूयो नमाम्यहम् ।। सत्यं सत्यं चदाम्यहम् इस मंत्र के पाठ से भगवान श्रीराम  इस मंत्र के जाप से रोगों का नाश  इस मंत्र के जाप से घर र्मे सदैव शांति आपत्तियों का नाश करते ्हे और धन  रहती हे। कलह समाप्त होता हे। চী লানা ;1 देते हें। सम्पदा 9""4"" nilkliig भोजन मंत्र दीप मंत्र महामंत्र कृष्णाय वासुदेवाय हविः दीप ज्योतिः पर ब्रह्म, ब्रह्मार्पण ब्रह्म ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्। परमात्मने। हरये दीप ज्योतिजनार्दनः ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं, प्रणतक्लेशनाशाय दीपो हरतु मे पापं, गोविंदाय नमो नमः ।। ब्रह्म कर्म समाधिना ।। दीप ज्योतिर्नमोडस्तुते ।। रात्रि में सोने से पहले इ्स मंत्र को पढने से हमारे भोजन से पहले उस मंत्र का पाठ दीप जलाकर डस मंत्र का पाठ श्रीकृष्ण की कृपा से सारे क्लेशों  ামান बुद्धि और तेज को बढ़ाता है। हमारी पार्पों का नाश करता हे। दुर्खो) का नाश होता हे। 04-Klas" 64*76 धरती प्रणाम मंत्र सूर्य नमन मंत्र प्रातः काल मंत्र आदिदेव नमस्तुभ्यं कराग्रे वसते लक्ष्मी देवी चसने समुद्र प्रसीद मम भास्कर। पर्वत स्तन मंडले। करमध्ये सरस्वती| दिवाकर नमस्तुभ्यं নিষ্য  पत्नि नमस्तुभ्यं करमूले तु गोविन्दः, नमोडस्तुते ।। #Il प्रभाते कर दर्शनम् ।। पादस्पर्श क्षमस्व  ٥٩٥ इस मंत्र से भगवान सूर्य का न  इस मंत्र को पढने के बाद धरती इस मंत्र को दोनों हाथों को देखते मन करने से घर में धन की वृद्धि को प्रणाम कर पैर रखें। हुए बोलें।  होती है। ctu रोग नाशक मंत्र गृह शांति मंत्र आपदानाशक मंत्र अच्युतानंदगोविंद आपदामपहर्तारं या देवी सर्व भूतेषु भेषजात्। शांति रूपेण संस्थिता दातारं सर्व सम्पदाम् नामाच्चारण लोकाभिरामं श्रीराम, नश्यन्ति सकला रोगाः नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्ये नमो नमः ।। भूयो भूयो नमाम्यहम् ।। सत्यं सत्यं चदाम्यहम् इस मंत्र के पाठ से भगवान श्रीराम  इस मंत्र के जाप से रोगों का नाश  इस मंत्र के जाप से घर र्मे सदैव शांति आपत्तियों का नाश करते ्हे और धन  रहती हे। कलह समाप्त होता हे। চী লানা ;1 देते हें। सम्पदा 9""4"" nilkliig भोजन मंत्र दीप मंत्र महामंत्र कृष्णाय वासुदेवाय हविः दीप ज्योतिः पर ब्रह्म, ब्रह्मार्पण ब्रह्म ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्। परमात्मने। हरये दीप ज्योतिजनार्दनः ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं, प्रणतक्लेशनाशाय दीपो हरतु मे पापं, गोविंदाय नमो नमः ।। ब्रह्म कर्म समाधिना ।। दीप ज्योतिर्नमोडस्तुते ।। रात्रि में सोने से पहले इ्स मंत्र को पढने से हमारे भोजन से पहले उस मंत्र का पाठ दीप जलाकर डस मंत्र का पाठ श्रीकृष्ण की कृपा से सारे क्लेशों  ামান बुद्धि और तेज को बढ़ाता है। हमारी पार्पों का नाश करता हे। दुर्खो) का नाश होता हे। 04-Klas" 64*76 - ShareChat