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#DJJS Ldh
DJJS Ldh - 0 अंतः 8 तुम हमारी शरण में हो " अनुभूति Enlightening Experiences 10 प्रकाशन तिथि 02 2026 वर्ष २०१ ७ की बात है, मुझे दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के माध्यम से ब्रह्मज्ञान की दीक्षा प्राप्त हुई। मैं नियमित रूप से सुबह- शाम साधना करता था। एक दिन मेरा किसी कारण से भीतर भारी बेचैनी थी। मैं आधी रात तक 2. मन बहुत व्याकुल ध्यान-साधना करता रहा। उसके बाद मैं Radio Divya Jyoti पर भागवत कथा ही मुझे नींद आ गई और फिर मुझे एक সুনন सुनने लगा। भागवत कथा सुनते इसलिए क्योंकि उसमें मुझे गुरु महाराज जी के दिव्य स्वप्न आया। दिव्य स्वप्न दर्शन हुए। उनका स्वर अत्यंत करुणा और अपनत्व से भरा था। गुरु महाराज जी मुझसे बोले- बेटा , तुम परेशान क्यों होे रहे हो! हम सदैव साथ हैं। বুদ্কাই बड़े प्यार से मुस्कुराते हुए वे कहने लगे- तुम हमारी शरण में हो, अब तुम्हें कभी कोई परेशानी नहीं होगी। याद रहे, गुरु सदैव 3777 ढाल बनकर रहेँगे। गुरुदेव के मुख से ये शब्द ही मेरी आँखों से आँसू बहने लगे। नींद గై7 सुनते खुलते मेरे मन में असीम आनंद और शांति थी। हृदय में यह दृढ़ विश्वास उतर चुका था- सतगुरु कभी अपने शिष्य का साथ नहीं छोड़ते हैं। बस मुझे अपनी साधना नहीं छोड़नी है। মুতেন্ধান गाज़ियाबाद , उत्तर प्रदेश অষন মন: STZDT 17 వగాగాT గాగాా ಞeಖarar aa-e 0987031437 1 ా =1 7TAN Pr1 === {ాాాగా oworia /ர=-~ச Tcwewerd diisorg 0 अंतः 8 तुम हमारी शरण में हो " अनुभूति Enlightening Experiences 10 प्रकाशन तिथि 02 2026 वर्ष २०१ ७ की बात है, मुझे दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के माध्यम से ब्रह्मज्ञान की दीक्षा प्राप्त हुई। मैं नियमित रूप से सुबह- शाम साधना करता था। एक दिन मेरा किसी कारण से भीतर भारी बेचैनी थी। मैं आधी रात तक 2. मन बहुत व्याकुल ध्यान-साधना करता रहा। उसके बाद मैं Radio Divya Jyoti पर भागवत कथा ही मुझे नींद आ गई और फिर मुझे एक সুনন सुनने लगा। भागवत कथा सुनते इसलिए क्योंकि उसमें मुझे गुरु महाराज जी के दिव्य स्वप्न आया। दिव्य स्वप्न दर्शन हुए। उनका स्वर अत्यंत करुणा और अपनत्व से भरा था। गुरु महाराज जी मुझसे बोले- बेटा , तुम परेशान क्यों होे रहे हो! हम सदैव साथ हैं। বুদ্কাই बड़े प्यार से मुस्कुराते हुए वे कहने लगे- तुम हमारी शरण में हो, अब तुम्हें कभी कोई परेशानी नहीं होगी। याद रहे, गुरु सदैव 3777 ढाल बनकर रहेँगे। गुरुदेव के मुख से ये शब्द ही मेरी आँखों से आँसू बहने लगे। नींद గై7 सुनते खुलते मेरे मन में असीम आनंद और शांति थी। हृदय में यह दृढ़ विश्वास उतर चुका था- सतगुरु कभी अपने शिष्य का साथ नहीं छोड़ते हैं। बस मुझे अपनी साधना नहीं छोड़नी है। মুতেন্ধান गाज़ियाबाद , उत्तर प्रदेश অষন মন: STZDT 17 వగాగాT గాగాా ಞeಖarar aa-e 0987031437 1 ా =1 7TAN Pr1 === {ాాాగా oworia /ர=-~ச Tcwewerd diisorg - ShareChat