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छत्रपति संभाजी महाराज का अंतिम संस्कार ११ मार्च १६८९ को औरंगजेब द्वारा हत्या किए जाने के बाद, भीमा नदी के तट पर स्थित वढू (बुद्रुक) गाँव में किया गया था। औरंगजेब द्वारा शव के टुकड़े कर नदी में फिकवा देने के बाद, साहसी स्थानीय ग्रामीणों (गोविंद गोपाल महार या बापूजी शिवले) ने शरीर के टुकड़ों को सिलकर, बहुत जोखिम उठाकर विधिवत अंतिम संस्कार किया। अंतिम संस्कार का स्थान: वढू बुद्रुक (भीमा-कोरेगांव के पास), महाराष्ट्र। अंतिम संस्कार के कर्ता: ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, स्थानीय निवासियों ने टुकड़ों को इकट्ठा कर अंतिम संस्कार किया। कुछ स्रोतों में गोविंद गोपाल महार का नाम प्रमुखता से आता है, जबकि कुछ अन्य स्रोतों में बापूजी शिवले द्वारा अंतिम संस्कार किए जाने का दावा किया जाता है। परिस्थिति: औरंगजेब ने शव को अपमानित करने के लिए उसके टुकड़े कर दिए थे, लेकिन मराठाओं ने रात के अंधेरे में उन टुकड़ों को इकट्ठा किया और सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया। समाधि: वढू बुद्रुक में आज भी संभाजी महाराज की एक समाधि बनी हुई है, जो उनके सर्वोच्च बलिदान की साक्षी है। उनकी शहादत के बाद ही मराठों में औरंगजेब के खिलाफ भयंकर रोष पैदा हुआ और उन्होंने अपने मतभेद भुलाकर औरंगजेब के विरुद्ध युद्ध तेज कर दिया |
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