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#મારી ગઝલ
મારી ગઝલ - जरूरत खींच लाती है इबादत कौन करता है बे मतलब यहां यारो सजदा कौन करता है तन्हाई में जाकर भी मैं तन्हा नहीं रहता मैं सबको याद करता గే मुझे याद कौन करता Altaf husen mulla जरूरत खींच लाती है इबादत कौन करता है बे मतलब यहां यारो सजदा कौन करता है तन्हाई में जाकर भी मैं तन्हा नहीं रहता मैं सबको याद करता मुझे याद कौन करता Altaf husen mulla - ShareChat