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जाग्रतादि अवस्थाएं तीन प्रकार की होती है। जाग्रत अवस्था स्वप्न अवस्था सुषुप्त अवस्था जाग्रत अवस्था में ग्रह पूर्ण रूप से जाग्रत होता है व् सौ प्रतिशत अच्छे फल देने में सक्षम होता है जब ग्रह स्वराशि, मूलत्रिकोण या उच्च राशि में हो तो वह जाग्रत अवस्था में होता है। स्वप्न अवस्था में ग्रह मध्यम बल का माना जाता है जब ग्रह मित्र या सम राशि में होता है तो यह ग्रह की स्वप्न अवस्था कहलाती है। स्वप्न अवस्था में ग्रह केवल पचास प्रतिशत फल ही प्रदान कर पता है। किसी ग्रह के नीच या शत्रु राशि में बैठने पर वह ग्रह सुषुप्त अवस्था में होता है। सुषुप्त अवस्था में ग्रह फल देने में अक्षम हो जाता है व् उसका फल नगण्य होता है। वर्गोत्तम ग्रह वर्गोत्तम ग्रह का बल व् शुभता बढ़ जाती है लग्न कुंडली व् नवमांश कुंडली में यदि कोई ग्रह एक ही राशि में उपस्थित है तो वह ग्रह वर्गोत्तम होता है वर्गोत्तम ग्रह उच्च व् योगकारक के सामान ही फल प्रदान करता है और कुंडली में जिस भी ग्रह के साथ बैठा है उसको अपना शुभ प्रभाव व् बल देता है। योगकारक ग्रह योगकारक ग्रह कुंडली का अति शुभफलदायी ग्रह होता है। योगकारक ग्रह की दशा में व्यक्ति को उत्तम फल की प्राप्ति होती है। यदि जन्म कुंडली में कोई ग्रह केंद्र और त्रिकोण दोनों भाव का स्वामी है तो वह उस कुंडली में योगकारक ग्रह है। अस्त ग्रह सूर्य से एक निश्चित दूरी से अधिक निकट आने पर ग्रह अस्त हो जाता है। यदि कोई ग्रह सूर्य की युति में अंशो में अधिक निकट आ जाता है तो वह अपना तेज़ व् प्रभाव खो देता है और निष्फल हो जाता है। सूर्य और ग्रहो का अंश अंतर जितना कम होगा वह ग्रह उतना ही निष्फल होता जायेगा। उदाहरण के लिए किसी कुंडली में सूर्य मेष राशि में 1 अंश, बुध मेष राशि में 14 अंश पर व् शुक्र 25 अंश पर बैठा है तो सूर्य से बुध की दूरी केवल 2 अंश है जबकि शुक्र व् सूर्य का अंश अंतर (25-12) 13 है अतः बुध ग्रह इस कुंडली में अस्त ग्रह है जबकि शुक्र सूर्य से अधिक दूर होने से अस्त ग्रह नहीं है। गोचरस्थ ग्रह गोचरस्थ ग्रह हमारी कुंडली में शुभफल प्रदान करता है इसके विपरीत अगोचरस्थ ग्रह अशुभ होता है। कुंडली में यदि ग्रह स्व राशि, उच्च राशि या मूलत्रिकोण राशि में बैठा है तथा सूर्य से अस्त नहीं है किसी ग्रह युद्ध में नहीं है या हारा नहीं है व् 6,8,12 भावो का उस ग्रह पर प्रभाव नहीं है तो ऐसा ग्रह गोचरस्थ ग्रह कहलाता है। #✡️सितारों की चाल🌠
✡️सितारों की चाल🌠 - आज केदर्शन श्री महाकालेश्वर उच्चैन १० जनवरी २०२६ नक्षत्र विचार Astro naval shukla Ji 430533/839 pandit  ज्योतिष कर्मपथ बताता है आज केदर्शन श्री महाकालेश्वर उच्चैन १० जनवरी २०२६ नक्षत्र विचार Astro naval shukla Ji 430533/839 pandit  ज्योतिष कर्मपथ बताता है - ShareChat