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किसी को गिराया न ख़ुद को उछाला कटा ज़िंदगी का सफ़र धीरे धीरे जहाँ आप पहुँचे छलांगें लगा कर वहाँ मैं भी पहुँचा मगर धीरे धीरे – रामदरश मिश्र #✍️ साहित्य एवं शायरी #📖 कविता और कोट्स✒️ #📓 हिंदी साहित्य
✍️ साहित्य एवं शायरी - किसी को गिराया न ख़ुद को उछाला कटा ज़िंदगी का सफ़र धीरे धीरे जहाँ आप पहुँचे छलांगें लगा कर वहाँ मैं भी पहुँचा मगर धीरे धीरे रामदरश मिश्र PAGE किसी को गिराया न ख़ुद को उछाला कटा ज़िंदगी का सफ़र धीरे धीरे जहाँ आप पहुँचे छलांगें लगा कर वहाँ मैं भी पहुँचा मगर धीरे धीरे रामदरश मिश्र PAGE - ShareChat