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Sahitya Page
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13 दिन पहले
किसी को गिराया न ख़ुद को उछाला कटा ज़िंदगी का सफ़र धीरे धीरे जहाँ आप पहुँचे छलांगें लगा कर वहाँ मैं भी पहुँचा मगर धीरे धीरे – रामदरश मिश्र
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