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#❤️जीवन की सीख #🗣कबीर अमृतवाणी📢 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गणेश आरती😇
❤️जीवन की सीख - टूटे सुजन मनाइए, जौ टूटे सौ बार। रहिमन फिरि फिरि पोहिए, टूटे मुक्ताहार।। स्वजन (सज्जन) कितनी ही बार रूठ जाएँ, उन्हें चाहिए। जैसे मोती की माला बार-्बार मनाना अगर टूट जाए तो उन मोतियों को फेंक नहीं देते, बल्कि उन्हें वापस माला में पिरो लेते हैं। क्योंकि सज्जन लोग मोतियों के समान होते हैं। टूटे सुजन मनाइए, जौ टूटे सौ बार। रहिमन फिरि फिरि पोहिए, टूटे मुक्ताहार।। स्वजन (सज्जन) कितनी ही बार रूठ जाएँ, उन्हें चाहिए। जैसे मोती की माला बार-्बार मनाना अगर टूट जाए तो उन मोतियों को फेंक नहीं देते, बल्कि उन्हें वापस माला में पिरो लेते हैं। क्योंकि सज्जन लोग मोतियों के समान होते हैं। - ShareChat