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#जय श्री हरि बिष्णु
जय श्री हरि बिष्णु - श्री हरि नारायण मूक होइ बाचाल पंगु चढ़इ गिरिबर गहन। जासु कृपाँ सो दयाल द्रवउ सुकल कलि मल दहन।। भावार्थः जिनकी कृपा से गूँगा सुंदर बोलने लगता है और लंगड़ा दुर्गम पहाड़ पर चढ़ जाता है, वे कलियुग के पापों को नष्ट करने वाले दयालु भगवान मुझ पर कृपा करें।  రైగి 3  / श्री हरि नारायण मूक होइ बाचाल पंगु चढ़इ गिरिबर गहन। जासु कृपाँ सो दयाल द्रवउ सुकल कलि मल दहन।। भावार्थः जिनकी कृपा से गूँगा सुंदर बोलने लगता है और लंगड़ा दुर्गम पहाड़ पर चढ़ जाता है, वे कलियुग के पापों को नष्ट करने वाले दयालु भगवान मुझ पर कृपा करें।  రైగి 3  / - ShareChat