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#💔मरीज-ए-इश्क❤
💔मरीज-ए-इश्क❤ - इंसान ही इंसान की दवा है, कोई ज़ख्म देता है, तो कोई मरहम लगा जाता है। दुनिया में हर चेहरा एक जैसा नहीं होता, 5 कोई दर्द बनता है... तो कोई सुकून बन जाता है। singh A इंसान ही इंसान की दवा है, कोई ज़ख्म देता है, तो कोई मरहम लगा जाता है। दुनिया में हर चेहरा एक जैसा नहीं होता, 5 कोई दर्द बनता है... तो कोई सुकून बन जाता है। singh A - ShareChat