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#✍मिर्झा गालिब शायरी
✍मिर्झा गालिब शायरी - उम्र भर ग़ालिब 66 यही भूल करता रहा, धूल चेहरे पर थी और आईना साफ करता रहा 99 उम्र भर ग़ालिब 66 यही भूल करता रहा, धूल चेहरे पर थी और आईना साफ करता रहा 99 - ShareChat