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#☝अनमोल ज्ञान
☝अनमोल ज्ञान - अंदर ] चलने वाली सांसे तक तुम्हारी नहीं है, तो फिर बाहर के दुःख को अपना माने क्यों बैंठे हो। जीवन संग्रह ओशो 1 अंदर ] चलने वाली सांसे तक तुम्हारी नहीं है, तो फिर बाहर के दुःख को अपना माने क्यों बैंठे हो। जीवन संग्रह ओशो 1 - ShareChat