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#*let us understand our religion #islam guide us in every field of life #Quran and We #सोचने वाली बात #points to ponder
*let us understand our religion - "तुम स्वयं अपने गवाह हो॰ "इंसानः सृजित, सचेत और অনাননক" 5/1/26 (1) 5<3/7 75:14 बल्कि इंसान स्वयं अपने ऊपर गवाह है (कि वह अपने आप को মলী-#ানি আননা ;)1 (२) कुरआन ७५:१५ (उसकी कोई सफ़ाई स्वीकार नहीं की जाएगी) चाहे वह कितने ही बहाने क्यों न पेश करे (अपने आपको निर्दोष सिद्ध करने के लिए)। (३) कुरआन ७६:१ निस्संदेह इंसान पर एक ऐसा लंबा समय गुज़रा है, जब वह कोई उल्लेख के योग्य वस्तु ही न था। 5/1/26 "तुम स्वयं अपने गवाह हो॰ "इंसानः सृजित, सचेत और অনাননক" 5/1/26 (1) 5<3/7 75:14 बल्कि इंसान स्वयं अपने ऊपर गवाह है (कि वह अपने आप को মলী-#ানি আননা ;)1 (२) कुरआन ७५:१५ (उसकी कोई सफ़ाई स्वीकार नहीं की जाएगी) चाहे वह कितने ही बहाने क्यों न पेश करे (अपने आपको निर्दोष सिद्ध करने के लिए)। (३) कुरआन ७६:१ निस्संदेह इंसान पर एक ऐसा लंबा समय गुज़रा है, जब वह कोई उल्लेख के योग्य वस्तु ही न था। 5/1/26 - ShareChat