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#💓 दिल के अल्फ़ाज़
💓 दिल के अल्फ़ाज़ - लगता नहीं है दिल मिरा उजड़े दयार में किस की बनी है आलम-ए-्ना-पाएदार में इन हसरतों से कह दो कहीं और जा बसें इतनी जगह कहाँ है दिल-ए-्दाग़-्दार में काँटों को मत निकाल चमन से ओ बाग़बाँ ये भी गुलों के साथ पले हैं बहार में बुलबुल को बाग़बाँ से न सय्याद से गिला क़िस्मत में क़ैद लिक्खी थी फ़स्ल -ए-बहार में कितना है बद-्नसीब 'ज़फ़र' दफ़्न के लिए दो गज ज़मीन भी न मिली कू-ए-्यार में Bahadur Shah Zafar लगता नहीं है दिल मिरा उजड़े दयार में किस की बनी है आलम-ए-्ना-पाएदार में इन हसरतों से कह दो कहीं और जा बसें इतनी जगह कहाँ है दिल-ए-्दाग़-्दार में काँटों को मत निकाल चमन से ओ बाग़बाँ ये भी गुलों के साथ पले हैं बहार में बुलबुल को बाग़बाँ से न सय्याद से गिला क़िस्मत में क़ैद लिक्खी थी फ़स्ल -ए-बहार में कितना है बद-्नसीब 'ज़फ़र' दफ़्न के लिए दो गज ज़मीन भी न मिली कू-ए-्यार में Bahadur Shah Zafar - ShareChat