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#love Shayriya
love Shayriya - रमज़ान से सीखिए (४) रमजानुल मुबारक में पूरी फैमिली सुबह शाम इकठ्ठे बैठ इस से मुहब्बत भी बढ़ती है और खाने कर खाना खाती है, में बरकत भी होती है, मजीद यह कि वक़्त पर खाना तैयार भी हो जाता है। इसी तरह हमें रमजानुल मुबारक के बाद भी इस मुबारक सिलसिले को जारी रखना चाहिए। जिस ह़ृद तक मुमकिन हो, सब घर वाले एक इकठ्ठे हो कर खाना खाएं, इस से मुहब्बत भी वक़्त पार बढ़ेगी और खाने में बरकत भी होगी। इन शा अल्लाह Mufti Saifullah Taunsvi हिन्दी तर्जुमा व तसहीलः अल्तमश आलम क़ासमी Basheerululoom Deenirahnumayi blogspot com रमज़ान से सीखिए (४) रमजानुल मुबारक में पूरी फैमिली सुबह शाम इकठ्ठे बैठ इस से मुहब्बत भी बढ़ती है और खाने कर खाना खाती है, में बरकत भी होती है, मजीद यह कि वक़्त पर खाना तैयार भी हो जाता है। इसी तरह हमें रमजानुल मुबारक के बाद भी इस मुबारक सिलसिले को जारी रखना चाहिए। जिस ह़ृद तक मुमकिन हो, सब घर वाले एक इकठ्ठे हो कर खाना खाएं, इस से मुहब्बत भी वक़्त पार बढ़ेगी और खाने में बरकत भी होगी। इन शा अल्लाह Mufti Saifullah Taunsvi हिन्दी तर्जुमा व तसहीलः अल्तमश आलम क़ासमी Basheerululoom Deenirahnumayi blogspot com - ShareChat