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#points to ponder #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #सोचने वाली बात #Quran and We #islam guide us in every field of life
points to ponder - एशुक्र (कृतज्ञता ) और कुफ़्न (नाशुक्री) के बीचः चुनाव आपका 25/1/26 (१) कुरआन १४:३४ उसने तुरम्हें वह सब कुछ दिया जो उससे माँगा| और यदि तुम 3# अल्लाह की नेमतों blessings को गिनना चाहो तो उन्हें गिन नहीं सकते। निश्चय ही इंसान बड़ा ज़ालिम और বরভা নাথুক্কা টI (2) 5<3/714:7  तुम्हारे रब ने और (याद करो) जब एलान कियाः श्यदि तुम कृतज्ञता (शुक्र) करोगे तो मैं तुम्हें और अधिक दूँगा , और यदि तुम करोगे तो नाशुक्री निश्चय ही मेरी सज़ा बहुत कठोर है।॰ (३) कुरआन २:1५२ "तो तुम मुझे याद करो , मैं तुम्हें याद करूँगा; और मेरा शुक्र अदा करो और मेरी नाशुक्री न करो।" 25/1/26 10:19 am एशुक्र (कृतज्ञता ) और कुफ़्न (नाशुक्री) के बीचः चुनाव आपका 25/1/26 (१) कुरआन १४:३४ उसने तुरम्हें वह सब कुछ दिया जो उससे माँगा| और यदि तुम 3# अल्लाह की नेमतों blessings को गिनना चाहो तो उन्हें गिन नहीं सकते। निश्चय ही इंसान बड़ा ज़ालिम और বরভা নাথুক্কা টI (2) 5<3/714:7  तुम्हारे रब ने और (याद करो) जब एलान कियाः श्यदि तुम कृतज्ञता (शुक्र) करोगे तो मैं तुम्हें और अधिक दूँगा , और यदि तुम करोगे तो नाशुक्री निश्चय ही मेरी सज़ा बहुत कठोर है।॰ (३) कुरआन २:1५२ "तो तुम मुझे याद करो , मैं तुम्हें याद करूँगा; और मेरा शुक्र अदा करो और मेरी नाशुक्री न करो।" 25/1/26 10:19 am - ShareChat