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#राधा
राधा - दिसम्बर २०२५ Yr  ' हे किशोरी राधे! मानव देह, तुम्हारी एवं तुम्हारे जनों की अकारण कृपा, इन सब को पाकर भी मैंने खो दिया। नर तनु हरि हरिजन अनुकंपा , सब ही पाय गँमायो  किशोरी राधे! ग्रन्थ - प्रेम रस मदिरा (पद संख्या 4 ५१, दैन्य माधुरी) जगद्गुरु श्री कृषालु जी महाराज सचना दिसम्बर २०२५ Yr  ' हे किशोरी राधे! मानव देह, तुम्हारी एवं तुम्हारे जनों की अकारण कृपा, इन सब को पाकर भी मैंने खो दिया। नर तनु हरि हरिजन अनुकंपा , सब ही पाय गँमायो  किशोरी राधे! ग्रन्थ - प्रेम रस मदिरा (पद संख्या 4 ५१, दैन्य माधुरी) जगद्गुरु श्री कृषालु जी महाराज सचना - ShareChat