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#सत भक्ति संदेश 🙏 सात समुद्र की मसि करूँ, लेखनी करूँ बनराय! धरती का कागज करूँ,गुरू गुण लिखा ना जाये! यदि सारी धरती को कागज मान लिया जाए, सारे जंगल-वनों की लकड़ी की कलम बना ली जाए तथा सातों समुन्द्रो की स्याही हो तो भी गुरु के गुण नहीं लिखे जा सकते। गुरु की महिमा अनंत है, गुरु का ज्ञान असीम और अनमोल है।
सत भक्ति संदेश 🙏 - SI SIK    सात समुद्र की मुसि करूँ, लेखनी करूँ बनराय ಹಾ ; धरती का कागज करूँ, गुरू गुण लिखा ना जाये ।। कबीर साहेब जी कहते हैंकि यदि सारी धरती को कागज मान लिया जाए , सारे जंगल -चनों की लकड़ी की कलम बना ली जाएतथा सातों समुन्द्रो की स्याही हो तो भी गुरु के गुण नहीं लिखे जा सकते | गुरु की महिमा अंनत हैं . गुरु का ज्ञान असीम और अनमोल हैं । FOLLOW US ON ; SATLOK ASHRAM MUNDKA OFFICIAL | SAMUNDKADELHI SADELHIMUNDKA SI SIK    सात समुद्र की मुसि करूँ, लेखनी करूँ बनराय ಹಾ ; धरती का कागज करूँ, गुरू गुण लिखा ना जाये ।। कबीर साहेब जी कहते हैंकि यदि सारी धरती को कागज मान लिया जाए , सारे जंगल -चनों की लकड़ी की कलम बना ली जाएतथा सातों समुन्द्रो की स्याही हो तो भी गुरु के गुण नहीं लिखे जा सकते | गुरु की महिमा अंनत हैं . गुरु का ज्ञान असीम और अनमोल हैं । FOLLOW US ON ; SATLOK ASHRAM MUNDKA OFFICIAL | SAMUNDKADELHI SADELHIMUNDKA - ShareChat