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#😒दर्द भरी शायरी🌸 #स्त्री #शायरी #सिंगल एटीट्यूड😎 #💔मरीज-ए-इश्क❤
😒दर्द भरी शायरी🌸 - डर और दवाब इतना था कि. मैं बेटी बनकर भी खुलकर जी नहीं पाई.. और अब समय बहु और पत्नी बनने का आ गया.. डर और दवाब इतना था कि. मैं बेटी बनकर भी खुलकर जी नहीं पाई.. और अब समय बहु और पत्नी बनने का आ गया.. - ShareChat