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#ॐ नमः शिवाय🕉️🔱 #ѕad ѕнayrι...... #❤️Dil ka dard❤️
ॐ नमः शिवाय🕉️🔱 - सम्मान न हमेशा मिलता है, न हमेशा लिया जा सकता है = क्योंकि वह बाहरी समझ पर टिका होता है। जो सम्मान माँगकर मन को संभालना चाहता है वह भीतर से डगमगाता ही रहता 81 परस्वाभिमान न माँगा जाता है, न छीना जा सकता है। सम्मान मिले तो मौन कृतज्ञता , न मिले तो शांत मौन। क्योंकि स्वाभिमान हो तो स्त्री भीतर से कभी खाली नहीं होती। सम्मान न हमेशा मिलता है, न हमेशा लिया जा सकता है = क्योंकि वह बाहरी समझ पर टिका होता है। जो सम्मान माँगकर मन को संभालना चाहता है वह भीतर से डगमगाता ही रहता 81 परस्वाभिमान न माँगा जाता है, न छीना जा सकता है। सम्मान मिले तो मौन कृतज्ञता , न मिले तो शांत मौन। क्योंकि स्वाभिमान हो तो स्त्री भीतर से कभी खाली नहीं होती। - ShareChat