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#om shanti brahmakumari
om shanti   brahmakumari - ओम् शान्ति रिवाइज 01-03-26 अव्यक्त 09-03-09 बापदादा "এসোে संग के रंग की और कम्बाइन्ड स्वरूप की यथार्थ होली मनाओ " होलीएस्ट बाप अपने होली बच्चों से होली मनाने आये हैं। सभी बच्चे आज होली बच्चे हैं | आप सब भी होली मनाने आये हैं। सोचो , आप होली आत्माओं के ऊपर कौन सा रंग लगा जो होली बन गये ! सभी के ऊपर यह रूहानी रंग चढा हुआ  है ना ! ब्राह्मण जीवन अर्थात् नया जीवन, इसमें पुराना कुछ हो नहीं सकता आज भी पुराने संस्कार को आने नहीं कौन सी होली मना रहे हो ? आज से विशेष कोई 2, होली मनानी है। मना सकते होे या कभी-कभी आ जायेंगे ? बापदादा যচ मुबारक दे रहे हैं , होली की , होली मनाने की | आपने आज आपको पद्म पद्मगुणा कौन सी होली मनाई ? कौन सी होली मनाई ? हो ली॰ सब कहो हो ली। ऐसे करो ( हाथ का इशारा ) हो ली | पक्का है ना ! मनाया ? मनाया ? अच्छा फिर कल माया भी सुन आयेगी, क्योंकि माया रही है लेकिन आप ऐसे नहीं करना। ( अपनी ओर नहीं बुलाना ) मजा है ना , इसमें मजा है ना। तो मजे में रहना बाप को याद रखना तो बाप हमें कितना रूहानी रंग डाल रहा है, जिससे आप होलीहंस बन गये बापदादा सारे दिन में गे गे के गीत बहुत सुनते हैं। करेंगे, दिखायेंगे , बनेंगे , लेकिन स्पीड क्या ? गे गे वाले बाप के साथ चलेंगे ? बाप तो एवररेडी है और गे गे वाले एवररेडी नहीं हुए।  अच्छा | सभी चारों ओर के बच्चों को भी बापदादा देख रहे हैं कि॰ तो ক্কী बैठे भी साइंस के साधन द्वारा मैजारिटी स्थानों में सेन्टर्स पर वह भी बापदादा देखते रहते हैं, आप टोली खाते होनातो वह भी टोली बांटते हैं।तो सभी को बापदादा भी देख रहे हैं कि कैसे दूर बैठे नजदीक का अनुभव कर रहे हैं। तो चारों ओर के बच्चों को जो सदा बाप समान सम्पन्न और सम्पूर्ण बनना है, इस संकल्प  किये हुए हैं और  का बल समय प्रति समय इस संकल्प को देते रहते को धारण ೯೯rl' हैं, ऐसे चारों ओर के शुभ संकल्प धारण करने वाले , साथ- साथ बाप की आशाओं को पूर्ण करने वाले आशाओं के सितारे , साथ- साथ दादी के बोल , कर्मातीत होना  ही है, होना ही है, होना ही है... और मम्मा के यह बोल कि सदा जो करना है सो आज करो, कल पर नहीं छोड़ो , और दीदी के यह बोल अब घर चलना है, यह कानों में गूंजना चाहिए। बार - बार अब घर चलना "  है।तो धुन " लगा दो कर्मातीत होना है, अब घर चलना है। यह बोल बार-बार स्मृति में लाने वाले समर्थ आत्माओं को बापदादा का होली बच्चों को होली को मुबारक हो , और साथ में सभी को बापदादा पहले ही मधुबन के घेवर के पहले सभी मुख खोलो और घेवर खाओ , खाया, तो सभी को बहुत- बहुत पद्मगुणा बापदादा और एडवांस पार्टी के सर्व बच्चों का यादप्यार और बाप को नमस्ते । ओम् शान्ति रिवाइज 01-03-26 अव्यक्त 09-03-09 बापदादा "এসোে संग के रंग की और कम्बाइन्ड स्वरूप की यथार्थ होली मनाओ " होलीएस्ट बाप अपने होली बच्चों से होली मनाने आये हैं। सभी बच्चे आज होली बच्चे हैं | आप सब भी होली मनाने आये हैं। सोचो , आप होली आत्माओं के ऊपर कौन सा रंग लगा जो होली बन गये ! सभी के ऊपर यह रूहानी रंग चढा हुआ  है ना ! ब्राह्मण जीवन अर्थात् नया जीवन, इसमें पुराना कुछ हो नहीं सकता आज भी पुराने संस्कार को आने नहीं कौन सी होली मना रहे हो ? आज से विशेष कोई 2, होली मनानी है। मना सकते होे या कभी-कभी आ जायेंगे ? बापदादा যচ मुबारक दे रहे हैं , होली की , होली मनाने की | आपने आज आपको पद्म पद्मगुणा कौन सी होली मनाई ? कौन सी होली मनाई ? हो ली॰ सब कहो हो ली। ऐसे करो ( हाथ का इशारा ) हो ली | पक्का है ना ! मनाया ? मनाया ? अच्छा फिर कल माया भी सुन आयेगी, क्योंकि माया रही है लेकिन आप ऐसे नहीं करना। ( अपनी ओर नहीं बुलाना ) मजा है ना , इसमें मजा है ना। तो मजे में रहना बाप को याद रखना तो बाप हमें कितना रूहानी रंग डाल रहा है, जिससे आप होलीहंस बन गये बापदादा सारे दिन में गे गे के गीत बहुत सुनते हैं। करेंगे, दिखायेंगे , बनेंगे , लेकिन स्पीड क्या ? गे गे वाले बाप के साथ चलेंगे ? बाप तो एवररेडी है और गे गे वाले एवररेडी नहीं हुए।  अच्छा | सभी चारों ओर के बच्चों को भी बापदादा देख रहे हैं कि॰ तो ক্কী बैठे भी साइंस के साधन द्वारा मैजारिटी स्थानों में सेन्टर्स पर वह भी बापदादा देखते रहते हैं, आप टोली खाते होनातो वह भी टोली बांटते हैं।तो सभी को बापदादा भी देख रहे हैं कि कैसे दूर बैठे नजदीक का अनुभव कर रहे हैं। तो चारों ओर के बच्चों को जो सदा बाप समान सम्पन्न और सम्पूर्ण बनना है, इस संकल्प  किये हुए हैं और  का बल समय प्रति समय इस संकल्प को देते रहते को धारण ೯೯rl' हैं, ऐसे चारों ओर के शुभ संकल्प धारण करने वाले , साथ- साथ बाप की आशाओं को पूर्ण करने वाले आशाओं के सितारे , साथ- साथ दादी के बोल , कर्मातीत होना  ही है, होना ही है, होना ही है... और मम्मा के यह बोल कि सदा जो करना है सो आज करो, कल पर नहीं छोड़ो , और दीदी के यह बोल अब घर चलना है, यह कानों में गूंजना चाहिए। बार - बार अब घर चलना "  है।तो धुन " लगा दो कर्मातीत होना है, अब घर चलना है। यह बोल बार-बार स्मृति में लाने वाले समर्थ आत्माओं को बापदादा का होली बच्चों को होली को मुबारक हो , और साथ में सभी को बापदादा पहले ही मधुबन के घेवर के पहले सभी मुख खोलो और घेवर खाओ , खाया, तो सभी को बहुत- बहुत पद्मगुणा बापदादा और एडवांस पार्टी के सर्व बच्चों का यादप्यार और बाप को नमस्ते । - ShareChat