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#Quran and We #सोचने वाली बात #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #*let us understand our religion #Islam and We
Quran and We - *सूच्चा ईमानः सभी रसूलों ( पैगंबरों) विश्वास और अल्लाह कीं ओर पर লীনা"* 10/1/26 *(1) {ై73ITT4864* কলাতক্ক্ী *और हमने कोई रसूल भेजा मगर् इसलिए कि अल्लाह औन्म्यत्दिै से ल्सकी जबः से उसकी आज्ञा मानी अपने। उन्होंने किया था, आपके पास जज़्ैल्औरिअयल्थाह साक्षकमा माँ्गते , ऊपर आ और यह रसूल(पैगंबर) (भी) उन्के क्षमा की दुआ करता, तो वे g अवश्य अल्लाहॅ को बहुत तौबा बाक़लुबूल करने वाला, अत्यंत दयाँवान *(2) ಕ3T 11:3* *और यह कि अपने रब से क्षमा कसुकी  लौँगो : फिर ओर तौबा करके एक निश्चित आओ। वह 35 अवधि तक अच्छा जीवन प्रदान करेगा और हर व्यक्ति को उसका गुणी प्रतिफ्ल देगा। औ़र यदि तुम 55 দ্কয স্লানদ্ধু लिए মুিন  एक कौम्ह्यारेत डर हैं। (भयानक) यातना का * *सूच्चा ईमानः सभी रसूलों ( पैगंबरों) विश्वास और अल्लाह कीं ओर पर লীনা"* 10/1/26 *(1) {ై73ITT4864* কলাতক্ক্ী *और हमने कोई रसूल भेजा मगर् इसलिए कि अल्लाह औन्म्यत्दिै से ल्सकी जबः से उसकी आज्ञा मानी अपने। उन्होंने किया था, आपके पास जज़्ैल्औरिअयल्थाह साक्षकमा माँ्गते , ऊपर आ और यह रसूल(पैगंबर) (भी) उन्के क्षमा की दुआ करता, तो वे g अवश्य अल्लाहॅ को बहुत तौबा बाक़लुबूल करने वाला, अत्यंत दयाँवान *(2) ಕ3T 11:3* *और यह कि अपने रब से क्षमा कसुकी  लौँगो : फिर ओर तौबा करके एक निश्चित आओ। वह 35 अवधि तक अच्छा जीवन प्रदान करेगा और हर व्यक्ति को उसका गुणी प्रतिफ्ल देगा। औ़र यदि तुम 55 দ্কয স্লানদ্ধু लिए মুিন  एक कौम्ह्यारेत डर हैं। (भयानक) यातना का * - ShareChat