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#📖 कविता और कोट्स✒️ #✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 #👍स्पेशल शायरी🖋
📖 कविता और कोट्स✒️ - ही तो है जो 3<[ सबसे हम दूर रहते हैं अपनी ওাপন রাস ম खुशी अकेले हम मगरूर रहते हैं तोड़ कर यक़ीन मेरा वो ख़ुद को मज़बूर कहते हैं हमने किनारा किया जबसे तो इसे वो गुरूर कहते हैं ही तो है जो 3<[ सबसे हम दूर रहते हैं अपनी ওাপন রাস ম खुशी अकेले हम मगरूर रहते हैं तोड़ कर यक़ीन मेरा वो ख़ुद को मज़बूर कहते हैं हमने किनारा किया जबसे तो इसे वो गुरूर कहते हैं - ShareChat