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#🖋ग़ालिब की शायरी #✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
🖋ग़ालिब की शायरी - "वक्त" ने तराशा है हमें , "सादगी एन्चमक" के साथ. ! किसी "बे-किरदार" जौहरी के "तलबगार" =686#.! "वक्त" ने तराशा है हमें , "सादगी एन्चमक" के साथ. ! किसी "बे-किरदार" जौहरी के "तलबगार" =686#.! - ShareChat