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#"राही" की कविताएं
"राही" की कविताएं - इंसा खुद को समझे समझदार और दूजों को मूर्ख यहां पर राही ". इंसा कभी समझ ना पाया कि खुद सा मूर्ख और कहां बाबता इंसा खुद को समझे समझदार और दूजों को मूर्ख यहां पर राही ". इंसा कभी समझ ना पाया कि खुद सा मूर्ख और कहां बाबता - ShareChat