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#👫 हमारी ज़िन्दगी #✍️ जीवन में बदलाव #☝ मेरे विचार #📒 मेरी डायरी #🌸 सत्य वचन
👫 हमारी ज़िन्दगी - इज़्ज़त इज़्ज़त का दरवाज़ा इतना छोटा होता है, कि उसमें दाखिल होने से पहले सर झुकाना पड़ता है। जो अकड़ लेकर चलता है,वो बाहरही रह जाता है, अहंकार का बोझ अक्सर राह भुला जाता है। नम्रता के कदम जहाँ पडते हैं चुपचाप , वहीं दिलों में खुल जाते हैं भरोसे के ख़्वाब। इज़्ज़त ऊँचाई से नहीं , झुकने से मिलती है, इज़्ज़त इज़्ज़त का दरवाज़ा इतना छोटा होता है, कि उसमें दाखिल होने से पहले सर झुकाना पड़ता है। जो अकड़ लेकर चलता है,वो बाहरही रह जाता है, अहंकार का बोझ अक्सर राह भुला जाता है। नम्रता के कदम जहाँ पडते हैं चुपचाप , वहीं दिलों में खुल जाते हैं भरोसे के ख़्वाब। इज़्ज़त ऊँचाई से नहीं , झुकने से मिलती है, - ShareChat