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#मेरी कविताएं 🥀 #मेरी शायरी 🖤
मेरी शायरी 🖤 - जिस रूपसी मुग्ध भयो, ঐ মন दिखावै सदा कलि के। वह ख्वाब छिन मा कै सगा छिन माहि दगा, गुल कौने खिलावै सदा खिलि के। जात 'सनेही" सनेह 48, भ्रमि सदा कलिके भटकावै कलिके। निर्मोहिनी मानिनी గే मन I, छलिया ्छलि जावै सदा छलि के।। सनेही"शैलेन्द्र मोहन शुक्ल जिस रूपसी मुग्ध भयो, ঐ মন दिखावै सदा कलि के। वह ख्वाब छिन मा कै सगा छिन माहि दगा, गुल कौने खिलावै सदा खिलि के। जात 'सनेही" सनेह 48, भ्रमि सदा कलिके भटकावै कलिके। निर्मोहिनी मानिनी मन I, छलिया ्छलि जावै सदा छलि के।। सनेही"शैलेन्द्र मोहन शुक्ल - ShareChat